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नेतरहाट भ्रमण..

वर्ष १९६८ दादाजी की लिखी "नेतरहाट भ्रमण" शीर्षक कविता.. नीचे लिखा है रौल नंबर २०६ के अभिभावक.. तब मेरे चाचाजी श्री नित्य निरंजन वहाँ नेतरहाट आवासीय विद्यालय के छात्र थे। ..सुन्दर शोभा बढते देखी, जब-जब आवत नेतरहाट। पहाड़ियों की उच्च शिखर पर करते लड़के तीन सौ साठ निवास।। यह विद्यालय तपोवन सदृश्य, बी.के. हैं जिनके प्रधान। देव, शास्त्री, भटनागर, खाँ, वर्मा, रमण, सक्सेना सा प्राण।। शान्त वातावरण शान्ति स्तुप, शान्ति को शान्ति का दान। सभी कर्मठ, सभी प्रवर्तक, गुण सभी के सभी महान।। अगल बगल में सुन्दर आश्रम, छात्रगणों का यह आवास। आश्रमाध्यक्ष महान दुई प्राणी, साक्षात शिष्य के माँ वो बाप।। देखे घूमकर विद्यालय, तीन महल के सुन्दर मकान। चौरंगी सम गोलाम्बर देखा, फूलें भी करती गुणगान।। कहीं वादन कहीं हरमुनियम, कहीं बेला की सुन्दर तान। स्वर की, मिली स्वर से.. गूंजते हैं समस्त बगान।। धन्य धन्य तू नेतरहाट, सैंतीस सौ फूट पर तेरा निवास। धन्य विद्यालय, धन्य श्रीमान.. कहत 'सहदेव' स्वयं बखान।। - सहदेव चन्द्र घोष २६/०७/१९६८ https://en.m.wikipedia.org/wik...

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