पूज्य-पथ..



फूल समझ कर पूज्य-पथ पर,
चलते-चलते मन जब थक जाता है,
तो काँटो पर चलकर ही,
कुछ शान्ति और कुछ सुख पाता है।

फूलों पर चलकर जग जाता, कि
जीवन में है घोर शिथिलता,
तन में रोग, आलस्य ही मन में,
जब पाता है वह उच्छृंखलता।

इसलिये मैनें काँटों पर ही,
चलते रहना अपनाया है।
काँटों पर चल ही मैंने,
जीवन में सबकुछ पाया है।

- एस. सी. घोष
पुलिस अॉफिस दरभंगा १२/०५/१९५७

Comments

Popular Posts