भूल..



भूल से आ गया हूँ मैं, यह मेरा रास्ता नहीं,
दूर की रोशनी को देख, मंजिल अपनी समझ ली मैनें।

यह मेरी भूल थी, अच्छा किया बता दिया,
शुक्रिया अदा किए अब जा रहा हूँ मैं।

दिन कितने गुजर गए, रास्ते कितने तय किए,
कदम-कदम बढाये जा रहा हूँ मैं।

मेघ-नाद हो रहा, बिजलियाँ चमक रही,
एक दर्द जो खुद में छिपाये जा रहा हूँ मैं।

घोर-घोर कालिमा, डगर किधर पता नहीं,
ठोकर पे ठोकरें "सहदेव" सा सहे जा रहा हूँ मैं।

कोई नहीं साथ में, सितारे भी छुप गये,
अश्कों पे अश्क बहाये जा रहा हूँ मैं।

अश्क बहेगा सदा, भूल जा तू भूल जा,
दूर ही दूर से, बहुत दूर अब जा रहा हूँ मैं।

- एस. सी. घोष (संकलित)
पुलिस आफिस चाईबासा बिहार/झारखण्ड

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