"समाज-बन्धु"



"समाज-बन्धु" शैशव शाली,
जगमग ये मेरा देश, जो गौरवशाली।
फहरायेगी विजय पताका,
जन-जन में जब फैलेगी लाली।।

"समाज-बन्धु" सामाजिकता का,
फिर ले आऐगा राम-राज।



जन हरिजन, सब मिल-जुलकर,
यदि पूर्ण करें हम अपना काज।।

हिलमिल हम मजबूत बनेंगे,
समाज-बन्धु की जय तुम बोलो।
सभ्य समाज बनाने को,
"समाज-बन्धु" को सब अपनाएंगे।।

- एस. सी. घोष
  पुलिस अॉफिस पूर्णियाँ १९६३-६४

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